‘सुबह के 10 बजे थे। उस दिन एकादशी थी, इसलिए मैं परिवार के साथ भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने काशीबुग्गा गई थी। वहां इतनी भीड़ थी कि हम एक घंटे तक लाइन में लगे रहे, तब मुख्य द्वार तक पहुंच पाए। मंदिर में अंदर जाने और बाहर निकलने का एक ही रास्ता था। वो भी बहुत संकरा था, इसलिए हालात बिगड़ने लगे। करीब 11:30 बजे भीड़ इतनी बढ़ गई कि अंदर जाने के लिए लोग एक-दूसरे को धक्का देने लगे।’ ‘मंदिर की सीढ़ियों पर ही 1000 से ज्यादा लोग थे, लेकिन कोई पुलिस, कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं था। गर्भगृह तक जाने वाले रास्ते पर भीड़ इतनी बढ़ गई कि लोहे की रेलिंग टूट गई। महिलाएं और बच्चे उसका सपोर्ट लेकर खड़े थे, वे 10 फीट नीचे गिर गए।’ ‘चीख-पुकार मच गई। लोग एक-दूसरे पर गिर रहे थे, लेकिन उन्हें बचाने वाला कोई नहीं था। अगर बाहर निकलने के लिए दूसरा रास्ता होता या पुलिस होती, तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता।’ 64 साल की येलाप्रगदा लक्ष्मी आंध्रप्रदेश में काशीबुग्गा के वेंकटेश्वर मंदिर में एक नवंबर को हुई भगदड़ की चश्मदीद हैं। एकादशी की वजह से मंदिर परिसर में तीन हजार से ज्यादा लोग थे। लक्ष्मी उस वक्त उन्हीं सीढ़ियों पर थीं, जहां रेलिंग टूटी। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई। 15 से ज्यादा लोग अब भी हॉस्पिटल में हैं। आंध्र प्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू ने घटना की हाईलेवल जांच और मरने वालों के परिवार को 15 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया है। मंदिर के मुख्य पुजारी हरिमुकुंद पांडा पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है, लेकिन क्या ये हादसा रोका जा सकता था, ये सवाल अभी बाकी है।