केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने चावल की गुणवत्ता में बड़ा सुधार करने का फैसला किया है जिसका लाभ देश के 80 करोड़ से अधिक लोगों को मिलने वाला है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है,जिसके बाद अब लाभार्थियों को पहले की तुलना में कहीं बेहतर गुणवत्ता वाला चावल मिलेगा जबकि उन्हें मिलने वाले राशन की मात्रा में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। करीब तीन दशकों बाद सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत दिए जाने वाले चावल की गुणवत्ता संबंधी मानकों में बदलाव किया है।
बता दें, नई व्यवस्था के तहत चावल में टूटे दानों की सीमा को काफी कम कर दिया गया है। कच्चे चावल में टूटे दानों की अधिकतम सीमा 25% से घटाकर अब 10% कर दी गई है। सरकार बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की खरीद तत्काल प्रभाव से शुरू करेगी और खरीफ विपणन सत्र 2027-28 तक इसे सभी खरीद करने वाले राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सरकार ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि लाभार्थियों को पहले जितना ही चावल मिलेगा, लेकिन अब और गुणवत्ता के लिहाज से बेहतर होगा। सरकार का कहना है कि अब लक्ष्य केवल खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बेहतर गुणवत्ता के साथ खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह फैसला गरीब परिवारों को बेहतर गुणवत्ता वाला चावल उपलब्ध कराने के साथ-साथ खाद्यान्न प्रबंधन, पारदर्शिता को भी मजबूत करेगा।
नई व्यवस्था में निकलने वाले टूटे चावल को अलग किया जाएगा और उसका उपयोग अन्य औद्योगिक और व्यावसायिक कार्यों में किया जाएगा। इससे गरीबों तक केवल बेहतर गुणवत्ता वाला चावल ही पहुंचेगा। सरकार के अनुसार इस सुधार से खाद्यान्न प्रबंधन प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी। टूटे चावल की सीधे मिलों से नीलामी,परिवहन और भंडारण लागत में कमी और जूट के बोरों की जगह HDPE बैगों के उपयोग से हर साल लगभग 2,161 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। साथ ही टूटे चावल की बिक्री से अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा, जिससे खाद्य सब्सिडी का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।
इस मॉडल का पहले हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के रूप में सफल परीक्षण किया जा चुका है। परीक्षण में बेहतर गुणवत्ता वाले चावल का बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण पूरी तरह व्यावहारिक पाया गया। वहीं अब नई व्यवस्था के तहत चावल की प्रत्येक बोरी पर QR Code लगाया जाएगा। इससे खरीद से लेकर वितरण तक पूरी सप्लाई चेन की डिजिटल ट्रैकिंग की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, भंडारण प्रबंधन बेहतर होगा और कालाबाजारी पर भी प्रभावी रोक लगेगी।











