गुजरात सरकार ने अपनी ‘दूध संजीवनी योजना’ को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब इस योजना को गुजरात सरकार ने सभी आदिजाति आईसीडीएस ब्लॉकों में लागू कर दी है। दरअसल राज्य सरकार ने यह फैसला आदिजाति और दूरस्थ क्षेत्रों में कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करने के लिए लिया है। राज्य के जो आदिजाति क्षेत्र हैं उनके लोगों को गुजरात सरकार विकास की मुख्यधारा से जोड़ना चाहती है।
53 ICDS ब्लॉकों में योजना लागू
बता दें की राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस संबंध में एक प्रस्ताव किया है, जिसके अंतर्गत आदिजाति जिलों में 53 ICDS ब्लॉकों में दूध संजीवनी योजना का विस्तार करने की मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही पहली बार योजना के लाभार्थियों के लिए हाई-फैट फोर्टिफाइड दूध के पायलट प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी दी गई है।
5 सालों में योजना का बड़ा विस्तार
उल्लेखनीय है कि दूध संजीवनी योजना की शुरुआत 24 दिसंबर, 2009 को हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से यह योजना सिर्फ 6 आदिजाति जिलों में प्रायोगिक रूप से की गई थी। देखते ही देखते इस योजना का विस्तार हुआ ओर ये योजना 5 सालों में 6 से 20 जिलों तक पहुँच गई। साल 2016 से इस योजना में सहकारी डेयरी क्षेत्र को भी जोड़ा गया।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे लोग
दूध संजीवनी योजना अब राज्य के सभी आईसीडीएस ब्लॉकों में लागू हो गई है। राज्य सरकार के 100 प्रतिशत व्यय पर 53 आईसीडीएस ब्लॉकों में दूध संजीवनी योजना शुरू करने के फैसले से हजारों नए लाभार्थी बच्चे और माताएं योजना के दायरे में आएंगे और आदिजाति क्षेत्रों में पोषण की समान उपलब्धता सुनिश्चित होगी। आदिजाति क्षेत्रों के लोगों को अब विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा।










