भारत बनेगा टॉय एक्सपोर्ट हब, निर्यात को 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य

पीयूष गोयल ने भारतीय खिलौना उद्योग से अगले चार सालों में खिलौनों के निर्यात को 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य तय करने का आह्वान किया है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत को टॉय एक्सपोर्ट हब बनाने का लक्ष्य रझा है। पीयूष गोयल ने भारतीय खिलौना उद्योग से अगले चार सालों में खिलौनों के निर्यात को 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य तय करने का आह्वान किया है। उन्होंने उद्योग को भरोसा दिलाया कि सरकार खिलौनों पर लागू अनिवार्य क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (क्यूसीओ) को वापस नहीं लेगी और घरेलू उद्योग को सस्ते विदेशी आयात (डंपिंग) से भी पूरी सुरक्षा प्रदान करेगी।
पीयूष गोयल ने 17वें टॉय बिज इंटरनेशनल बी2बी एक्सपो 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया का खिलौना बाजार करीब 120 अरब डॉलर का है, लेकिन इसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 0.2 से 0.3 प्रतिशत के बीच है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह बड़ा अवसर है और देश को वैश्विक बाजार में कहीं अधिक हिस्सेदारी हासिल करनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि पिछले चार सालों में भारत के खिलौना निर्यात में 239 प्रतिशत की बदोतरी दर्ज की गई है, लेकिन उद्योग को इससे संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि अगले चार वर्षों में मौजूदा स्तर से 10 गुना निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय खिलौना निर्माता अब सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित न रहें, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाएं। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत 9 मुक्त व्यापार समझौते कर चुका है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए विकसित देशों के बाजारों तक पहुंच आसान हुई है।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय खिलौना उद्योग को अत्याधुनिक मशीनरी अपनानी चाहिए और उत्पादों की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का सुझाव भी दिया, जहां उत्पाद परीक्षण, डिजाइन विकास और नवाचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों।
पीयूष गोयल ने बताया कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) इसी वर्ष लागू होने की उम्मीद है। इसके अलावा कनाडा, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी), मेक्सिको और ब्राजील के साथ भी व्यापार समझौतों पर बातचीत तेजी से चल रही है। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के लागू होने से भारतीय खिलौना उद्योग को नए अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेंगे और देश का निर्यात तेजी से बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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