करीब 500 सालों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर के ट्रस्ट की आर्थिक तस्वीर अब लगातार बदलती हुई नजर आ रही है। यह संभव हो सका है उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की योजनाओं और प्रयासों से, जो अब अयोध्या के बढ़ते महत्व और विकास की नई कहानी उजागर कर रहा है। कभी श्रद्धालुओं के दान पर निर्भर रहने वाले राम मंदिर ट्रस्ट के लिए अब अपना निवेश ही बड़ा आय का स्त्रोत बन गया है। जिससे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आर्थिक तस्वीर में बड़ा बदलाव आया है।
ट्रस्ट की मजबूत निवेश रणनीति
ट्रस्ट के ताजा वित्तीय आंकड़े बताते हैं कि ट्रस्ट की कमाई का सबसे बड़ा जरिया अब श्रद्धालुओं का दान नहीं, बल्कि उनके निवेश से मिलने वाला ब्याज बन गया है। पहली बार ब्याज से होने वाली कमाई ने भक्तों से मिले दान को पीछे छोड़ दिया है। ये आँकड़े ट्रस्ट की मजबूत निवेश रणनीति को दर्शा रहे हैं।
कमाई का सबसे बड़ा सहारा
बता दें कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के अनऑडिटेड खातों के अनुसार, ट्रस्ट को निवेश से ब्याज आय 151.80 करोड़ रुपये प्राप्त हुई है, जबकि जो श्रद्धालुओं ने स्वैच्छिक दान किया उसकी राशि 149.36 करोड़ रुपये दर्ज की गई। इससे साफ है कि ब्याज से होने वाली कमाई ने इस बार दान की रकम को पीछे छोड़ दिया है।
ट्रस्ट की रिकॉर्ड कमाई
ट्रस्ट के पास इस समय कुल 1,876.30 करोड़ रुपये का कोष है। साथ ही ट्रस्ट के पास 2.57 एकड़ जमीन, 323 किलोग्राम सोना और 751.98 किलोग्राम चांदी भी है। इसके अलावा ट्रस्ट के पास करीब 7.74 लाख रुपये की नकदी मौजूद है। वहीं अब निवेशों से मिलने वाला ब्याज ट्रस्ट की आय का बड़ा हिस्सा बन रहा है।
आर्थिक व्यवस्था हो रही मजबूत
ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति को लेकर सामने आए ताजा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद ट्रस्ट का वित्तीय आधार लगातार मजबूत हुआ है। वहीं अब निवेश से मिलने वाली आय उसकी आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रही है।











