राज्यसभा में बीजेपी को मिली बड़ी मजबूती, जानें 7 साल में कैसे बदले राजनीतिक समीकरण?

भारतीय राजनीति में राज्यसभा का जून 2019 के बाद समीकरण बहुत तेजी से बदला है।

भारतीय राजनीति के समीकरण में अकसर बदलाव देखा जा सकता है। चुनाव आने से पहले या फिर चुनाव सम्पन्न होने के बाद। बात करें भारतीय राजनीति में राज्यसभा की तो जून 2019 के बाद इसका समीकरण बहुत तेजी से बदला है। इसका कारण यह है की इस दौरान विपक्ष के 25 सांसदों में से कुछ सांसदों ने अपनी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। कई सांसद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए या फिर सांसद NDA का समर्थन लेकर दोबारा राज्यसभा पहुँच गए। इससे विपक्ष को तो बड़ा झटका लगा लेकिन मोदी सरकार को राज्यसभा में बहुत मजबूती मिली।

25 सांसदों ने बदला समीकरण
गौरतलब है की उस समय 25 सांसदों में से 24 ने या तो BJP में विलय किया या राज्यसभा से इस्तीफा दिया, ताकि वे अपने कार्यकाल के बचे हुए समय के लिए दोबारा चुनाव लड़ सकें। एक अन्य सांसद NDA की सहयोगी पार्टी TDP में शामिल हुआ। TDP को भी तब मुश्किलों का सामना करना पड़ा था जब वह NDA का हिस्सा नहीं थी। YSR कांग्रेस के एक 26वें सांसद ने राज्यसभा से इस्तीफा देकर TDP जॉइन की, लेकिन उन्हें उपचुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं मिला।

बीजेपी को मिल रही मजबूती
बता दें की 24 जुलाई तक BJP के नेतृत्व वाले NDA के पास 154 सांसद हो जाएंगे, जब पश्चिम बंगाल की तीन सीटों पर उपचुनाव होने हैं। सदन में कुल 245 सदस्य हैं और NDA को दो-तिहाई बहुमत तक पहुँचने के लिए सिर्फ़ नौ और सांसदों की ज़रूरत होगी। पश्चिम बंगाल उपचुनाव से भाजपा को राज्यसभा में तीन सीटें मिलने की उम्मीद है, जिससे पार्टी की संख्या 117 और एनडीए की 154 हो जाएगी। पिछले सात सालों में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, AAP, YSR कांग्रेस, BJD, समाजवादी पार्टी, बोडो पीपल्स फ्रंट और TDP जैसे विपक्षी दलों के कई सांसद BJP में शामिल हुए।

हार या अंदरूनी कलह बनी वजह
चुनाव के दौरान विश्लेषण से साफ हुआ की लोकसभा या विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टियों की हार के बाद ही यह दलबदल की राजनीति हुई। वहीं कुछ पार्टियों में अंदरूनी कलह सामने आई। वहीं दिलचस्प बात यह है कि BJP में शामिल होने वाले ज़्यादातर नेताओं को अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद राज्यसभा में दोबारा मौका नहीं मिला।

बीजेपी में शामिल हुए कई सांसद
जून 2019 में TDP संसदीय दल के दो-तिहाई सदस्यों के राज्यसभा में BJP में विलय के साथ यह सिलसिला शुरू हुआ। यह विलय आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की पार्टी की हार के तुरंत बाद हुआ, जहाँ YSR कांग्रेस ने सत्ता हासिल की थी। उस समय TDP NDA का हिस्सा नहीं थी। वहीं इस साल अप्रैल में राघव चड्ढा के नेतृत्व वाले AAP के दस में से सात सांसद BJP में शामिल हो गए।  2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हार के बाद BJD के तीन सांसद BJP में चले गए। समाजवादी पार्टी के तीन सांसदों ने बीजेपी जॉइन कर ली। वहीं कांग्रेस छोड़कर भी दो नेता BJP में आए।  

मोदी सरकार की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा
इन समीकरणों से साफ जाहिर है की इस बदलाव से मोदी सरकार को मजबूती मिली है या यूं भी कह सकते हैं कि यह मोदी सरकार की राजनीतिक रणनीति का ही हिस्सा था। जहां राज्यसभा में बीजेपी की पकड़ मजबूत हो गई और विपक्ष कमजोर पड़ गया।

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