चंडीगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। ईडी ने IDFC फर्स्ट बैंक-AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में कथित तौर पर हुए 593 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में अपनी पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर कर दी है। अपनी शिकायत में ईडी ने 14 लोगों और व्यावसायिक इकाइयों को नामजद किया गया है और 200.8 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की गई है।
4 अगस्त को अगली सुनवाई
बता दें की ईडी ने अपनी शिकायत पंचकूला में जज विजयंत सहगल की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश की। हालांकि कोर्ट ने शिकायत की जांच को टाल दिया क्योंकि यह शिकायत हजारों पन्नों की थी। कोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच करने और एक आरोपी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी का इंतजार करने के लिए कहा। जिसे लेकर अब अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
कोर्ट के सख्त निर्देश
कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि न्यायिक हिरासत में बंद चार गिरफ्तार आरोपियों को अगली सुनवाई की तारीख पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया जाए। शिकायत में नामजद लोगों में IDFC फर्स्ट बैंक के पूर्व कर्मचारी रिभव ऋषि और अभय कुमार, रियल एस्टेट व्यवसायी विक्रम वाधवा और हरियाणा पंचायत विभाग के पूर्व सुपरिटेंडेंट नरेश कुमार शामिल हैं। इसमें चार बिजनेस एंटिटीज का भी नाम है।
593 करोड़ रुपये का गबन
गौरतलब है कि ED की जांच CBI की उस FIR से शुरू हुई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि हरियाणा सरकार के विभागों को करोड़ों का चूना लगाया गया है। ईडी ने बताया की IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में खातों का इस्तेमाल किया गया। जिससे फर्जी बिलों, जाली दस्तावेजों, धोखाधड़ी वाले बैंकिंग लेनदेन के जरिए हरियाणा सरकार के विभागों से लगभग 593 करोड़ रुपये का गबन किया गया है।











