योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि, मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य क्षेत्र में की मिसाल कायम

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई सकारात्मक पहलें की है।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई सकारात्मक पहलें की है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना योगी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। और इसी दिशा में योगी सरकार ने उल्लेखनीय उपलब्धि भी हासिल की है। उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में पिछले तीन महीनों के दौरान जीतने भी प्रसव हुए वो स्वास्थ्य संस्थानों में ही हुए हैं। इन 16 जिलों में एक भी गैरसंस्थागत प्रसव दर्ज नहीं किया गया। सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ नवजात को बढ़ावा देने वाली योगी सरकार की यह उपलब्धि इन्ही सकारात्मक पहलों का परिणाम माना जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं को किया गया मजबूत
योगी सरकार की इन पहलों का उद्देश्य मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। इसी दिशा में योगी सरकार अस्पतालों में आवश्यक उपकरणों, प्रशिक्षित मानव संसाधन और दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ रेफरल व्यवस्था को भी मजबूत करने का कार्य कर रही है। इसकी जानकारी देते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि, “प्रत्येक गर्भवती महिला को गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों यही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि इसी प्रकार संस्थागत प्रसव की दर लगातार बनी रहती है तो सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ नवजात के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में उत्तर प्रदेश नई मिसाल कायम कर सकेगा।

किन जिलों ने लहराया परचम?
संयुक्त निदेशक डॉ. शालू गुप्ता ने बताया कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए राज्य की योगी सरकार के दौरान पिछले कुछ वर्षों में निरंतर प्रयास किए गए हैं। एचएमआईएस से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक जिन जिलों में एक भी प्रसव गैरसंस्थागत नहीं हुआ उनमें गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, वाराणसी, अमेठी, अयोध्या, सुलतानपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, गाजीपुर, शामली, गाजियाबाद, हाथरस, इटावा, महोबा व कौशांबी शामिल है। योगी सरकार की जननी सुरक्षा एवं मातृत्व लाभ से जुड़ी योजनाओं ने गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के लिए प्रेरित किया है। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रावती का मानना है कि अस्पतालों में प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों की मौजूदगी, आपातकालीन प्रसूति सेवाएं, नवजात की तत्काल देखभाल, रक्त की उपलब्धता और आवश्यकता पड़ने पर रेफरल की व्यवस्था होने से जटिल परिस्थितियों में भी मां और शिशु की जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

जागरूकता और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत लाई रंग
वहीं योगी सरकार की इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि , यह उपलब्धि सिर्फ स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमता का परिणाम नहीं है, बल्कि समुदाय की बढ़ती जागरूकता और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत का भी परिणाम है। आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं से नियमित संपर्क बनाए रखा, प्रसव की संभावित तिथि से पहले परिवारों को तैयार किया और समय पर अस्पताल तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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