नए आपराधिक कानूनों से पारदर्शी बनी न्यायिक प्रक्रिया, लोगों का कानूनी प्रणाली में बढ़ा भरोसा

संसद सत्र के दौरान लोकसभा में गृह मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने और इसे तेज, सरल और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए नए आपराधिक कानून लागू किए गए।

देश में लागू नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी असर अब दिखने भी लगा है। इन नए कानूनों से न्याय प्रक्रिया में तेजी आई है साथ ही देश की न्याय प्रक्रिया पारदर्शी भी बनी है। संसद सत्र के दौरान लोकसभा में गृह मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने और इसे तेज, सरल और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए नए आपराधिक कानून लागू किए गए। इन नए प्रावधानों ने मामलों का तेजी से और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित किया है।

कानूनी प्रणाली में भरोसा बढ़ा
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने कहा की नए आपराधिक कानूनों से लोगों का कानूनी प्रणाली में भरोसा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच को प्राथमिकता दी गई है, ताकि सूचना दर्ज होने के दो महीने के अंदर ही जांच पूरी की जा सके।

न्यायिक प्रक्रिया हुई तेज
गृह मंत्रालय ने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तेज, प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए ई-साक्ष्य, ई-समन और न्याय-श्रुति जैसे डिजिटल अनुप्रयोग विकसित किए गए हैं। जहां ई-साक्ष्य डिजिटल सबूतों को कानूनी, वैज्ञानिक और छेड़छाड़-रोधी तरीके से इकट्ठा किया जाता है और सुरक्षित रखने और इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा करने में मदद मिलती है।

वर्चुअल उपस्थिति की सुविधा
न्याय-श्रुति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वर्चुअल उपस्थिति की सुविधा दी जा रही है। आरोपी व्यक्तियों, गवाहों, पुलिस अधिकारियों, सरकारी वकीलों, कैदियों और अन्य संबंधित लोगों की वर्चुअल उपस्थिति की सुविधा देती है। गौरतलब है की इन कानूनों को 25 दिसंबर, 2023 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया था। बीएनएस के कुछ हिस्सों को छोड़कर, इसके प्रावधान और बीएसए 1 जुलाई, 2024 से लागू हो गए।

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