महाराष्ट्र विधानसभा में बुलढाणा जिले के जलगांव जामोद में पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया। पुलिस ने एक निर्दोष आदिवासी पिता-बेटे की अनुचित गिरफ्तारी और हिरासत में कथित तौर पर प्रताड़ित किये जाने का मामला सामने आया। मामले को लेकर जमकर हंगामा हुआ। जिसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की, सरकार न सिर्फ दोषी अधिकारियों को निलंबित करेगी, बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी शुरू करेगी और दोषी पाए जाने पर उन्हें नौकरी से हमेशा के लिए बर्खास्त भी करेगी।
अधिकारियों की बर्खास्तगी की मांग
बता दें कि यह मुद्दा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा -एसपी) के रोहित पवार ने उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने एक लापता व्यक्ति के मामले को सुलझाने में अपनी नाकामी छिपाने के लिए गरीब आदिवासियों को फंसाया था। वहीं सरकार के शुरुआती लिखित जवाब को अपर्याप्त बताते हुए विधायक पवार ने मांग की पुलिस बल में कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को केवल निलंबित करने के बजाय बर्खास्त किया जाये।
पुलिस अधिकारियों पर एक्शन
पीड़ित परिवार के लिए तत्काल 5-10 लाख रुपये की सहायता राशि की भी मांग की। मुख्यमंत्री ने पुलिस की गंभीर गलती को माना और इस मामले में शामिल अपराध शाखा के अधिकारियों, पुलिस निरीक्षक और उप -निरीक्षक को तत्काल निलंबित कर दिया गया।
तीन महीने में जांच होगी पूरी
मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि विभागीय जांच तीन महीने के अंदर पूरी कर ली जायेगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर बर्खास्तगी के योग्य पाये जाने वाले किसी भी अधिकारी को बर्खास्त कर दिया जायेगा।











