जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने एक नया आयाम स्थापित कर लिया है। राज्य में 20 हजार अमृत सरोवर बनाए जा चुके है। जिसने पूरे देश के लिए नया मॉडल तैयार किया है। पिछले पांच सालों में करीब पौने दो लाख तालाबों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया है।
पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश
बता दें की अमृत सरोवरों के निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। पूरे देश के कुल अमृत सरोवरों में उत्तर प्रदेश की अकेले करीब 27 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसे लेकर सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि पिछले पांच वित्तीय वर्षों में जल संबंधी कार्यों पर 16 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का काम किया गया, जिससे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में असर
योगी सरकार की इस अमृत सरोवर योजना का असर अब दिखने भी लगा है। खेती, भूजल स्तर, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। जल संरक्षण के मामले में उत्तर प्रदेश ने अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है।
जल संकट का स्थायी समाधान
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अमृत सरोवर योजना को सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया। गांवों में पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, नए जलाशयों का निर्माण किया जा रहा है जिसने जल संरक्षण को आगे बढ़ाने का काम किया है। जिन गाँव में पानी की समस्या रहती थी वो अब कम होने लगी है वहीं जल संकट से जूझ रहे इलाकों को इस योजना से स्थायी समाधान मिलने लगा। वहीं इन अमृत सरोवरों का सबसे बड़ा लाभ कृषि क्षेत्र को मिला है। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को सबसे बड़ी राहत मिली है।











