गुजरात में भूपेंद्र पटेल सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। जिसके तहत अब हर आंगनवाड़ी केंद्र पर महिलाओं के नेतृत्व वाली आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियां बनाई जाएंगी। इन समितियों का उद्देश्य पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रारंभिक बाल शिक्षा में समुदाय की भागीदारी बढ़ाना है। इस कदम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है इससे बच्चों और माताओं को मिलने वाली सेवाओं की निगरानी को भी बेहतर बनाया जाएगा।
फैसले का क्या उद्देश्य?
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में यह फैसला लिया गया। जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ को जमीनी स्तर पर और मजबूत करना है। ये समितियां 0 से 6 साल के बच्चों में कुपोषण और विकास में देरी की समस्या पर फोकस करेंगी और इसे कम करने के साथ उनके समग्र विकास पर ध्यान देंगी।
प्रत्येक आंगनवाड़ी प्रबंधन समिति का गठन
अधिकारियों ने बताया, “महिला एवं बाल विकास मंत्री मनीषा वकील के मार्गदर्शन में संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) प्रत्येक आंगनवाड़ी प्रबंधन समिति का गठन करेंगे। समिति की सभी सात सदस्य महिलाएं होंगी। महिला सुपरवाइजर इसकी अध्यक्ष और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सदस्य-सचिव होंगी।” समिति में एक आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी में पंजीकृत 3 से 6 साल के बच्चों की दो माताएं, स्थानीय स्वयं सहायता समूह या एनजीओसीएसओ की एक महिला सदस्य और नजदीकी सरकारी प्राथमिक स्कूल की एक महिला शिक्षक भी शामिल होंगी।











