प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “प्रधानमंत्री जन धन योजना” ने 12 साल पूरे कर लिए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से 28 अगस्त, 2014 को यह योजना शुरू की गई थी। यह योजना पीएम मोदी के अपने पहले कार्यक्रमों में से एक थी। इस योजना के इन 12 वर्षों में देश के वित्तीय परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आया है। “प्रधानमंत्री जन धन योजना” विश्व स्तर पर वित्तीय समावेशन की दिशा में एक मिसाल बन गई है।
वंचित व्यक्तियों को मिला बैंक खाता
बता दें कि प्रधानमंत्री जन धन योजना यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक बैंकिंग सुविधा से वंचित व्यक्तियों को बैंक खाता मिले। इन बैंक खातों में न्यूनतम शेष राशि की कोई आवश्यकता नहीं है और कोई रखरखाव शुल्क नहीं है। वहीं प्रत्येक खाते के साथ एक निःशुल्क रुपे डेबिट कार्ड मिलता है, जिसमें 2 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा कवर शामिल है, जो डिजिटल लेनदेन और वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
10 हजार रुपए तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा
इसके साथ ही इस योजना के तहत खाताधारकों को 10 हजार रुपए तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी मिलती है। इससे आपातस्थिति में सुरक्षा प्रदान करती है। इस योजना को लेकर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पूरी जानकारी दी है। मंत्री ने कहा कि 28 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत की गई थी। प्रधानमंत्री जन धन योजना से समाज के अंतिम व्यक्ति – सबसे गरीब व्यक्ति – तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच हुई है। बिना किसी देरी के लाभार्थियों को इस योजना का लाभ मिल रहा है।
ग्रामीण या उप-नगरीय क्षेत्रों में 78 प्रतिशत खाते
बता दें कि प्रधानमंत्री जन धन योजना योजना के अंतर्गत ग्रामीण या उप-नगरीय क्षेत्रों में 78 प्रतिशत खाते खोले गए हैं। इसके साथ ही लगभग 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के स्वामित्व में हैं, जो इस योजना की प्राथमिकता को दर्शाता है। सरकार की इस योजना का उद्देश्य देश के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले वंचितों को औपचारिक वित्तीय क्षेत्र में लाना था।












